|| कितना चालाख हे इन्शान ||
कितना चालाख हे इन्शान |
जब श्री राम आए तो पूजे श्री परशुराम को |
जब श्री कृष्ण आए तो पूजे श्री राम को || १ ||
कितना चालाख हे इन्शान |
जब श्री मोसेस सन्देश लाए तो सुने श्री अब्राहम क़ी |
जब धरती पर पदारे श्री येसुजी , तो चढ़ो दियो सूली |
जब सामने आए आदिशक्ती, तो अंधे पूजे पथरों की || २ ||
कितना मूर्ख हे इन्शान |
जिसे करें चीज़े पोलिश उसे पिये और नशे में डूबे |
जिसे किटाणु मारे उसे बिड़ी बनाकर फूंके |
अहंकार में खोए हर वकत खुद की नाक कटाये ||३ ||
कितना मूर्ख हे इन्शान |
सब किताबें पड़े, पंडितों के भाषण सुने, पर अपने अंदर ना झांके |
कुत्ता तो चोर जाने, पर यह तो भोंदू और साधु का फरक ना पहचाने |
अगुरू जो पैसे और हीरों में खेले उसीकी सेवा करे |
और जो सच्चा संत आये, तो उने दिन रात सताए || ४ ||
कितना चालाख हे इन्शान |
भगवान का नाम लेकर हिंसा करे |
चमड़े और जात का भेद करके, सरे विश्व में युद्ध रचाए |
देवी की पुजा करें पर नारियो पे अत्याचार करे |
समानता छोड़कर अमरों और नेताओं की चापलूसी करे || ५||
पर कितना खुशनसीब हे इन्शान |
सभी जानवरों में ईश्वर की छवि हे वो |
इस धरती को स्वर्ग बनाने की शक्ती रखता हे वो |
कुंडलिनी जागरण करके इंसान से संत बने का अधिकारी हे वो || ६ ||
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