Tuesday, January 19, 2021

Prasad poem about human beings in Hindi

                                                       || कितना चालाख हे इन्शान || 

कितना चालाख हे इन्शान | 

जब श्री राम आए तो पूजे श्री परशुराम को | 

जब श्री कृष्ण आए तो पूजे श्री राम को || १ || 

कितना चालाख हे इन्शान |  

जब श्री मोसेस सन्देश लाए तो सुने श्री अब्राहम क़ी | 

जब धरती पर पदारे श्री येसुजी , तो  चढ़ो दियो सूली | 

जब सामने आए आदिशक्ती, तो अंधे पूजे पथरों की || २ || 

कितना मूर्ख हे इन्शान |   

जिसे करें चीज़े पोलिश उसे पिये और नशे में डूबे | 

जिसे किटाणु मारे उसे बिड़ी बनाकर फूंके | 

अहंकार में खोए हर वकत खुद की नाक कटाये ||३ || 

कितना मूर्ख हे इन्शान | 

सब किताबें पड़े, पंडितों के भाषण सुने, पर अपने अंदर ना झांके | 

कुत्ता तो चोर जाने, पर यह तो भोंदू और साधु का फरक ना पहचाने | 

अगुरू जो पैसे और हीरों में खेले उसीकी सेवा करे | 

और जो सच्चा संत आये, तो उने दिन रात सताए || ४ || 

कितना चालाख हे इन्शान | 

भगवान का नाम लेकर हिंसा करे | 

चमड़े और जात का भेद करके, सरे विश्व में युद्ध रचाए | 

देवी की पुजा करें पर नारियो पे अत्याचार करे | 

समानता छोड़कर अमरों और नेताओं की चापलूसी करे || ५|| 

पर कितना खुशनसीब  हे इन्शान | 

सभी जानवरों में ईश्वर की छवि हे वो | 

इस धरती को स्वर्ग बनाने की शक्ती रखता हे वो | 

कुंडलिनी जागरण करके इंसान से संत बने का अधिकारी हे वो || ६ || 



 

      








 


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